गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर संदेश---
गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर की पूर्व संध्या पर हम अपने सभी मित्रों को शुभकामनाएं देते हुए बहुत-बहुत बधाई देते हैं। हमें अब आवश्यकता है किस देश में भ्रष्टाचार और गरीबी हटाने के लिए अथक मेहनत करनी होगी। हम सभी को बिल्कुल तैयार रहना चाहिए कि किस प्रकार से समाज में बदलाव किया जा सकता है। आज जब हम ग्रामीण क्षेत्र की तरफ देखते हैं तो स्वतंत्रता के 70 वर्षों के बाद भी कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ है। जिस तरफ भी देखते हैं कोई बदलाव नहीं समझ में आता है। आम नागरिक समस्याओं से ग्रसित है। भारतीय परंपराओं के नाम पर आज अंधविश्वास चरम पर है और लोगों को धर्म के नाम पर गुमराह किया जा रहा है। झूठे वादों से और गलत बातों से हमें सचेत होना होगा व विकास के रास्ते से भ्रष्टाचार को मिटाना होगा।
समाज में व्याप्त सामाजिक समस्याओं का समाधान बहुत ही आवश्यक है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार प्रदान किया जाए। जातिवाद और धर्म वाद को हटा दिया जाए। सभी जाति और धर्म के लोगों को समान समझ करके विकास में समाहित किया जाए।
अधिक से अधिक लोगों को विभिन्न कौशल प्रशिक्षण देकर के उनके स्वरोजगार की व्यवस्था की जाए जिससे हमारे गांव और कस्बों में नए रोजगार का विकास हो सके। अदा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके। हम अपने देश के नागरिकों को कौशल के आधार पर केवल नौकरी करने वाला न बनाएं बल्कि नौकरी देने वाला बनाएं।
देश से धारा 370 हटा करके सीधे-सीधे कश्मीर को अपने देश का अभिन्न अंग घोषित किया जाए। जितना पैसा आतंकवाद को मिटाने में खर्चा किया जा रहा है। उतना ही उसको विकास में लगाया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में आज खेती की क्षेत्रफल की कम होती फसल को देख कर के ऐसा लगता है कि आगे आने वाले समय में देश के नागरिकों को भोजन की बहुत ही बड़ी किल्लत हो जाएगी। भोजन के लिए लोगों को दूसरे देशों की पैदावार पर निर्भर होने का समय आया जा रहा है। विकास के नाम पर लगातार हो रहे पहाड़ पर नियंत्रण किया जाए और जमीन को बचाया जाए जिससे ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रफल पर फसल पैदा हो सके। देश को खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर कर दिया जाए। ग्रामीण क्षेत्र में जो भी नवयुवक अपना रोजगार करना चाहे तो उसे तत्काल प्रशिक्षण देकर के स्वरोजगार स्थापित करने में मदद की जाए।
निर्माण क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण आज सड़क व सरकारी भवन कमजोर बनाए जा रहे हैं। कमीशन खोरी और भ्रष्टाचार को मिटाते हुए उचित कार्रवाई करके सरकारी व्यक्ति को नौकरी से तत्काल हटाया जाएI इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के द्वारा प्राप्त भ्रष्टाचार के वीडियो ऑडियो और फोटोस पर अध्ययन करते हुए कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाए।
लोग एक-एक दिन में करोड़पति बन जाते हैं। कभी गांव में बनने वाला प्रधानमंत्री बन जाता है तो जिला पंचायत का सदस्य बनने वाला व्यक्ति अपने आप करोड़पति हो जाता है। विधायक और सांसद अल्प समय में ही इतने आर्थिक रूप से मजबूत हो जाते हैं कि उनकी धन संपदा पर व्याख्या करना भी कमजोर हो जाता है। लोग गलत धंधे करके केवल पैसे ही कट्ठा करने में अपना ध्यान देते हैं। ऐसे सभी उपायों को रोकते हुए हर व्यक्ति का एक व्यक्तिगत इंडेक्स बनाया जाए जिसमें उसके योग्यता नौकरी और व्यापार मकान या संपदा का उचित लेखा-जोखा दर्ज हो। उसके आय और विवरण का समस्त विवरण उसमें दर्ज हो। बिना सरकारी टैक्स दिए हुए कोई भी व्यक्ति एक भी पैसा अपने पास न रख सके। भ्रष्टाचार का पैसा इकट्ठा न कर सके।
देश के प्रत्येक नागरिक को यह हिदायत दी जाए कि उसके पास केवल और केवल एक ही मकान हो। सबको मकान की व्यवस्था की जाए और सबके रहने के लिए उचित स्थान हो। एक परिवार या एक नाम पर केवल एक प्लाट या एक मकान ही हो जिससे सब के लिए प्लाट या मकान का सृजन किया जा सके।
देश के नागरिक से या अपेक्षा की जाए वो एक या दो बच्चे से ज्यादा न पैदा करें। यदि दो बच्चों से ज्यादा पैदा करता है तो उसको किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता न दी जाए। जनसंख्या नियंत्रण पर बहुत ही तेजी और सख्ती से उपाय किया जाए। जिससे आगे रोजगार स्वास्थ्य व अन्य विधाओं पर नागरिकों को पूर्ण रूप से सुविधा दी जा सके।
देश के किसानों को उचित प्रकार से पैदावार बढ़ाने के लिए एक ठोस नीति पर सरकार को कार्य करना चाहिए। किसी भी प्रकार का ऋण माफी या अन्य तरीके से पैसा न दे कर के उचित मात्रा में फसल पैदा करने पर अनुदान की घोषणा की जाए। जिससे जो लोग केवल लोन लेकर के पैसा माफी का इंतजार करते हैं उनको काम करने की सीख मिले। खाद की उचित व्यवस्था की जाए। सस्ती दरों पर विद्युत प्राप्त हो। किसानों की फसल का उचित मूल्य मिले जिससे उनके फसल के खर्च पर उचित लाभ हो सके। खाद्य फसलों के प्रसंस्करण एवं रखरखाव के लिए गोदामों का उचित व्यवस्था की जाए। किसानों को परोक्ष रूप से व्यवसायीकरण के लिए पेश करते हुए किसानी के साथ-साथ छोटे व्यवसाय से पारंगत करते हुए उनके आर्थिक उत्थान का व्यापक खाका खींचा जाए। किसान के द्वारा उसे सहयोग के तरीके से पशुपालन के तरफ आकृष्ट किया जाए। अधिक से अधिक कोशिश की जाएगी ग्रामीण क्षेत्र में हमारा नागरिक सुदृढ़ हो चल सके।
औद्योगिक इकाइयों द्वारा आधा धुंध कमाई के तरीकों पर लगाम लगाई जाए। एक निश्चित मात्रा में लाभ लेते हुए नागरिकों का शोषण रोका जाए। औद्योगिक व्यक्तियों द्वारा लगातार अपनी पूंजी बढ़ा करके देश में नागरिकों का लगातार शोषण किया जा रहा है, जिससे नागरिकों के बीच में एक खाई का निर्माण हो रहा है। करोड़पति बन रहे हैं और बढ़ रहे हैं तो गरीबी भी तेजी से बढ़ रही है। विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल करते हुए आद्योगिक इकाइयों पर शोध पर कार्य किया जाए जिससे उत्पादन सरल और कम लागत से हो सके।
देश की सुरक्षा के लिए एक निश्चित योजना बनाई जाए जिससे सीमा पर किसी प्रकार का विवाद पैदा न हो सके। झूठी और कल्पना सील विधियों को नकारते हुए एक सुंदर तरीके से सुरक्षा के उपायों को लागू किया जाए। सैन्य उपकरणों का निर्माण के अधिकारिक क्षेत्र से औद्योगिक इकाइयों को बढ़ावा दिया जाए।
बहुत से पहले ऐसे हैं जिसमें ध्यान देने की जरूरत है आवश्यकता है शिक्षा का विकास आज के शोध के आधार पर निर्धारित होना चाहिए और छात्र में योग्यता का विकास हो। आज विज्ञान की कक्षाओं को ठेंगा दिखाया जा रहा है हमारे विज्ञान के स्नातक और परास्नातक छात्र प्राइवेट स्कूलों से केवल डिग्रियां प्राप्त कर रहे हैं। बुनियादी सुविधाओं का विकास करते हुए आवश्यक है कि नकल का विनाश कर प्रयोगात्मक पहलू पर ठोस कार्रवाई की जाए। जरूरत है कि हमारा छात्र इतना तेज हो की उसे नकल का सहयोग ना लेना पड़े। इसके लिए एक उचित और ठोस नीति बनाने की कार्रवाई की जाए।
देश की स्वतंत्रता के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी आज नागरिकों को उचित ढंग का इलाज मुहैया नहीं हो पा रही है। हम अस्पतालों में मातृ शिशु कल्याण केंद्रों में वाहन प्रकार के जो स्थाई भवन बना रहे हैं और कार्य करने के लिए नियुक्तियां कर रहे हैं। उनसे कोई हल होता नहीं दिखाई दे रहा है। योग डॉक्टरों व कर्मचारियों का नियुक्त करने के बाद लोग प्राइवेट अस्पतालों की तरफ ज्यादा भगते हैं। इसके लिए अस्पतालों को जिम्मेदार बनाया जाए उनका उच्चीरण किया जाए, बदलाव लाया जाए कि लोगों को उचित इलाज अस्पतालों में मिल सके। कोई भी नागरिक चिकित्सा से वंचित न हो सके। चिकित्सा के किसी भी क्षेत्र में किसी भी प्रकार का नागरिक को पैसा का लगाना पड़े।
खनिज के क्षेत्र में लगातार निगरानी की जाए और काला धन पैदा करने के इस धंधे को रेखांकित करते हुए विशेष खोज और खबर जारी रखी जाए। नदियों और प्राकृतिक रचनाओं को संरक्षित कार्य करने का बहुत ही आवश्यकता है। नदियों के संरक्षण के लिए इनके आधारभूत स्वरूप को कतई छेड़ा न जाए।
किसी भी प्रकार के प्रदूषण से हमारे किसी भी नागरिक को किसी प्रकार का कष्ट नहीं होना चाहिए। नगर हो शहर हो या कस्बा हो या गांव हो निर्धारित मानक के आधार पर ही उत्सर्जन होना चाहिए।
सड़क पर किसी भी प्रकार की दुर्घटना को बचाने की कोशिश की जानी चाहिए। यदि कोई नई सड़क या पुरानी सड़क हैं तो उसका ऐसा निर्माण किया जाना चाहिए, कि कम से कम दुर्घटना हो और मानव हानि न हो सके।
हमें अपने एक एक नागरिक की जान की रक्षा करनी होगी और उस के रक्षा के लिए पूर्ण रूप से हम यह सरकार को जिम्मेदार होना पड़ेगा। चाहे रोग हो, चाहे अपराध हो या दुर्घटनाएं हो, सबसे सचेत होकर के एक-एक आदमी की जान को बचाने का अभियान चलाना चाहिए।
देश का कोई भी नागरिक भूख से नहीं मरना चाहिए और हमें वास्तविक नियंत्रण करते हुए उन गरीबों को छाटना पड़ेगा जो भूख से दो-चार हो रहे हैं।
कानून और व्यवस्था की उचित समीक्षा करते हुए इसे सही ढंग से लागू किया जाए जिससे कि देश और प्रदेश में यह महसूस हो कि वास्तव में कानून का पालन हो रहा है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे का उत्पीड़न ना कर सके और यदि इस प्रकार की घटना होती है तो उसे शीघ्र दंड दिया जा सके।
देश के बहुत से स्वरूप हैं जो मानव विकास से संबंधित हैं हमें उन पर उचित ढंग से कार्रवाई करके मानव के हित स्वरुप विकास करना चाहिए। मैं चाहता हूं कि इस प्रजातंत्र में मानव हित में मानवता का प्रसार हो और सभी को उसके अधिकारों का संरक्षण हो।
उपरोक्त विचारों के साथ ही मैं अपने गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर बहुत-बहुत बधाइयां देता हूं और आशा करता हूं कि सरकार आम नागरिक के हित में कार्य करेगी।
जय भारत !
जय ! जय ! जय !
( हो सकता है कि कोई शब्द गलत हो तो कृपया उसे विवरण के अनुसार समझ लिया जाए, पढ़ लिया जाए, गलती के लिए हमें क्षमा करें)