यू.पी. बोर्ड द्वारा परीक्षा शुल्क बढ़ाया जाना---
माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा दसवीं और बारहवीं के परीक्षा शुल्क में ढाई गुना की बहुत की गई है जो कि अपने आपने बहुत ही शर्मनाक होगी। यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल संस्थागत विद्यार्थी का शुल्क रु. ₹200.75 से बढ़ाकर ₹500.75 का दिया है। हाईस्कूल व्यक्तिगत परीर्थी का शुल्क ₹306.00 से बढ़ाकर ₹706.00 कर दिया गया है। इसी क्रम में इंटरमीडिएट संस्थागत छात्र परीक्षा शुल्क ₹220.75 से ₹600.75 कर दिया गया है। इंटर व्यक्तिगत परीक्षार्थी का शुल्क ₹406.00 से बढ़ाकर ₹806.00 कर दिया गया है। अभी तक वैसे भी कमजोर और गरीब वर्ग के बच्चे शुल्क अदा करने में बहुत ही पीछे रहते थे। ग्रामीण क्षेत्र में तमाम ऐसे प्राइवेट विद्यालय हैं जो चैत के वादे में भी बच्चों को शिक्षा देते हैं।
प्राथमिक किससे बारवीं तक आने में लगभग कमजोर वर्ग का 40 प्रतिशत बच्चा शिक्षा से हट जाता है। शिक्षा व्यवस्था से इन कमजोर वर्ग के बच्चों का हट जाना बहुत ही दुखदाई है। अब उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा परीक्षा शुल्क का बढ़ाया जाना अपने आप में और जटिलता पैदा करेगा। जहां की ग्रामीण भारत शिक्षा जगत में अपनी पहचान खो रहा है। भूमि का बंटवारा होते-होते बड़े किसानों का लगभग सीमांत किसानों मे तब्दील हो जाना या आय का अन्य कोई साधन न होना आदि ग्रामीण नागरिकों का रहन-सहन ही नहीं बल्कि उनके बच्चों के गिरते शिक्षा स्तर के लिए भी जिम्मेदार है।
ऐसी स्थिति में जब कि गांव का व्यक्ति, अपने बच्चे की मासिक फीस भरने में सक्षम नहीं है और वार्षिक फीस भी उसे भरनी पड़ती है। एक दम से यू.पी. बोर्ड के द्वारा फीस को ढाई गुणा बढ़ा देना, अपने आप में बहुत ही दुखदाई साबित होगा। आज जहां ग्रामीण भारत में नागरिकों की गिरती हुई आर्थिक स्थिति से सभी परिचित है फिर भी अनजान बन, एकदम से फीस बढाकर कमजोर वर्ग की कमर तोड़ दी गई है। ऐसा लगता है, जैसे सोची समझी साजिश के तहत कमजोर वर्ग को शिक्षा से वंचित करने के लिए एकदम से फीस बढ़ा दी गई है।
सबकी बात करने वालों को सोचना चाहिए कि हमारे कदम से कहीं ऐसा न हो कि कोई भी शिक्षा से वंचित रह जाए। ऐसा लगता है जैसे जानबूझकर भी सत्ता में बैठे लोग गरीबों को व उनके बच्चों के शैक्षणिक-सामाजिक- आर्थिक विकास को रोकने का कार्य कर रहे हैं। बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाकर, चर्चा में रहने वाले लोग, आज हर छात्र से ज्यादा से ज्यादा धन उगाही करना चाहते हैं। मैं अपने मित्रों व समाज के लोगों से आपेक्षा करता हूं कि यथाशीघ्र आंदोलन चलाकर इस फीस वृद्धि को वापस लेने के लिए यू पी सरकार को मजबूर किया जाना चाहिए।
जय भारत !
जय जय जय !
विनोद सचान**
No comments:
Post a Comment