आनलाइन भ्रष्टाचार---
रेलवे ऑनलाइन खरीदारी के तर्ज पर ऑनलाइन रिश्वत का भी मामला आज प्रकाशित हुआ है। विदित हो कि राजधानी एक्सप्रेस में आरपीएफ. के दो सिपाहियों आशीष चौहान और राम नयन यादव ने bsf जवान देवराम थापा से ₹ दस हजार घूस में ले लिए। ₹10000 नगद न होने पर सात हजार नकद और 3000/- रुपया Pay tm के माध्यम से सिपाही के खाते में भुगतान किया गया। देखिए आज की भष्टाचार की स्थिति कितनी भयावह और भय पूर्ण है कि नकद तो नकद अब आनलाइन भी घूस ली जा रही है।
मैं देवाराम थापा जी को बहुत ही धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होने देश की व्यवस्था को सुधारने में अपना महती योगदान दिया है। सरकारी विभाग में तमाम तरह से कमचारी और अधिकारी जनता के साथ खिलवाड़ कर के लगातार भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। रेलवे विभाग ने भी भ्रष्टाचार ऊंचाइयों तक है। रेलवे के पग-पग मे, हर कदम, हर जगह, भ्रष्टाचार लगातार किया जा रहा है। आज देव राम भाटी जी की गर्भवती पत्नी जब ट्रेन में नहीं चढ़ पाइ तो उन्हें चेन पुलिंग करनी पड़ी। राजधानी एक्सप्रेस में एस्कॉर्ट के दोनों सिपाही उनके पास आए और उनसे तरह तरह की बातें करके, धमका कर, दस हजार रुपए मांगने लगे। देवाराम भाटी ने सिपाहियों को ₹7000 नगद और ₹3000 का भुगतान Pay tm से किया। इसके बाद उन्होंने उच्च अधिकारियों को अपने साथ होने वाले भ्रष्टाचार की शिकायत की। जहां दूसरे लोग इस तरीके की घटनाओं से और पुलिस से अपना पीछा छुड़ा करके, अपना कार्य या यात्रा जारी रखते है। वहां पर देव राम भाटी जी ने भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए अपनी पहल की। देव राम भाटी जी बहुत ही प्रशंसा के पात्र है। हमारी उनको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं। हम उनके साहस की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हैं।
पूरे देश में विभिन्न ट्रेनों में जनरल डब्बे लगाए जाते हैं। जहां से ट्रेनें बनती है और जहां तक चलती है, इन जनरल यात्रियों के साथ सीट बेंच कर जबरजस्त पैसा वसूला जाता है। यात्रियों को तो अभी यात्रा करनी होती है और जयसे भी बनता है यात्रा करने में ही अपनी भलाई समझते हैं। यात्री पैसा देकर चुपचाप अपने गन्तव्य को चला जाता है। बहुत ज्यादा ज्यादती होने पर भी, उसे अपने अकेले होने का भय भी सताता रहता है। वह हिम्मत ही नहीं कर पाता तमाम तरीके की कानूनी पचड़े में पड़ने की।
अब बारी सरकार की है कि सरकार इस भ्रष्टाचार के प्रकरण को ठीक से अध्ययन करते हुए और उचित निर्णय लेते हुए भ्रष्टाचारी लोगों को बर्खास्त कर, अच्छा सबक दिलाने का कार्य करेंगे। आज जनता में संदेश जाना चाहिए कि इस तरीके के भ्रष्टाचारी लोग अपने कार्य पद रहने लायक नहीं है।
जुर्म सहने की बजाए, यदि संघर्ष किया जाए, तो दूसरों के साथ कम से कम घटनाएं नहीं होंगी, जो हमारे साथ हो जाती है।
जय भारत !
जय जय जय ।
"विनोद सचान"

No comments:
Post a Comment