Sunday, July 14, 2019

आनलाइन भ्रष्टाचार-रेलवे R.P.F.

आनलाइन भ्रष्टाचार---
रेलवे ऑनलाइन खरीदारी के तर्ज पर ऑनलाइन रिश्वत का भी मामला आज प्रकाशित हुआ है। विदित हो कि राजधानी एक्सप्रेस में आरपीएफ. के दो सिपाहियों आशीष चौहान और राम नयन यादव ने bsf जवान देवराम थापा से ₹ दस हजार घूस में ले लिए। ₹10000 नगद न होने पर सात हजार नकद और 3000/- रुपया Pay tm के माध्यम से सिपाही के खाते में भुगतान किया गया। देखिए आज की भष्टाचार की स्थिति कितनी भयावह और भय पूर्ण है कि नकद तो नकद अब आनलाइन भी घूस ली जा रही है।

मैं देवाराम थापा जी को बहुत ही धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होने देश की व्यवस्था को सुधारने में अपना महती योगदान दिया है। सरकारी विभाग में तमाम तरह से कमचारी और अधिकारी जनता के साथ खिलवाड़ कर के लगातार भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। रेलवे विभाग ने भी भ्रष्टाचार ऊंचाइयों तक है। रेलवे के पग-पग मे, हर कदम, हर जगह, भ्रष्टाचार लगातार किया जा रहा है। आज देव राम भाटी जी की गर्भवती पत्नी जब ट्रेन में नहीं  चढ़ पाइ तो उन्हें चेन पुलिंग करनी पड़ी। राजधानी एक्सप्रेस में एस्कॉर्ट के दोनों सिपाही उनके पास आए और उनसे तरह तरह की बातें करके, धमका कर, दस हजार रुपए मांगने लगे। देवाराम भाटी ने सिपाहियों को ₹7000 नगद और ₹3000 का भुगतान Pay tm से किया। इसके बाद उन्होंने उच्च अधिकारियों को अपने साथ होने वाले भ्रष्टाचार की शिकायत की। जहां दूसरे लोग इस तरीके की घटनाओं से और पुलिस से अपना पीछा छुड़ा करके, अपना कार्य या यात्रा जारी रखते है। वहां पर देव राम भाटी जी ने भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए अपनी पहल की। देव राम  भाटी जी बहुत ही प्रशंसा के पात्र है। हमारी उनको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं। हम उनके साहस की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हैं।

पूरे देश में विभिन्न ट्रेनों में जनरल डब्बे लगाए जाते हैं। जहां से ट्रेनें बनती है और जहां तक चलती है, इन जनरल यात्रियों के साथ सीट बेंच कर जबरजस्त पैसा वसूला जाता है। यात्रियों को तो अभी यात्रा करनी होती है और जयसे भी बनता है यात्रा करने में ही अपनी भलाई समझते हैं। यात्री पैसा देकर चुपचाप अपने गन्तव्य को चला जाता है। बहुत ज्यादा ज्यादती होने पर भी, उसे अपने अकेले होने का भय भी सताता रहता है। वह हिम्मत ही नहीं कर पाता तमाम तरीके की कानूनी पचड़े में पड़ने की।
अब बारी सरकार की है कि सरकार इस भ्रष्टाचार के प्रकरण को ठीक से अध्ययन करते हुए और उचित निर्णय लेते हुए भ्रष्टाचारी लोगों को बर्खास्त कर, अच्छा सबक दिलाने का कार्य करेंगे। आज जनता में संदेश जाना चाहिए कि इस तरीके के भ्रष्टाचारी लोग अपने कार्य पद रहने लायक नहीं है।

जुर्म सहने की बजाए, यदि संघर्ष किया जाए, तो दूसरों के साथ कम से कम घटनाएं नहीं होंगी, जो हमारे साथ हो जाती है।

जय भारत !
जय जय जय ।

"विनोद सचान"



Thursday, July 11, 2019

यू.पी.बोर्ड द्वारा परीक्षा शुल्क ढाई गुना बढ़ाया जाना

यू.पी. बोर्ड द्वारा परीक्षा शुल्क बढ़ाया जाना---
माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा दसवीं और बारहवीं के परीक्षा शुल्क में ढाई गुना की बहुत की गई है जो कि अपने आपने बहुत ही शर्मनाक होगी। यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल संस्थागत विद्यार्थी का शुल्क रु. ₹200.75 से बढ़ाकर  ₹500.75 का दिया है। हाईस्कूल व्यक्तिगत परीर्थी का शुल्क ₹306.00 से बढ़ाकर ₹706.00 कर दिया गया है। इसी क्रम में इंटरमीडिएट संस्थागत छात्र परीक्षा शुल्क ₹220.75 से ₹600.75 कर दिया गया है। इंटर व्यक्तिगत परीक्षार्थी का शुल्क ₹406.00 से बढ़ाकर ₹806.00 कर दिया गया है। अभी तक वैसे भी कमजोर और गरीब वर्ग के बच्चे शुल्क अदा करने में बहुत ही पीछे रहते थे। ग्रामीण क्षेत्र में तमाम ऐसे प्राइवेट विद्यालय हैं जो चैत के वादे में भी बच्चों को शिक्षा देते हैं।

प्राथमिक किससे बारवीं तक आने में लगभग कमजोर वर्ग का 40 प्रतिशत बच्चा शिक्षा से हट जाता है। शिक्षा व्यवस्था से इन कमजोर वर्ग के बच्चों का हट जाना बहुत ही दुखदाई है। अब उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा परीक्षा शुल्क का बढ़ाया जाना अपने आप में और जटिलता पैदा करेगा। जहां की ग्रामीण भारत शिक्षा जगत में अपनी पहचान खो रहा है। भूमि का बंटवारा होते-होते बड़े किसानों का लगभग सीमांत किसानों मे तब्दील हो जाना या आय का अन्य कोई साधन न होना आदि ग्रामीण नागरिकों का रहन-सहन ही नहीं बल्कि उनके बच्चों के गिरते शिक्षा स्तर के लिए भी जिम्मेदार है।

ऐसी स्थिति में जब कि गांव का व्यक्ति, अपने बच्चे की मासिक फीस भरने में सक्षम नहीं है और वार्षिक फीस भी उसे भरनी पड़ती है। एक दम से यू.पी. बोर्ड के द्वारा फीस को ढाई गुणा बढ़ा देना, अपने आप में बहुत ही दुखदाई साबित होगा। आज जहां ग्रामीण भारत में नागरिकों  की गिरती हुई आर्थिक स्थिति से सभी परिचित है फिर भी अनजान बन, एकदम से फीस बढाकर कमजोर वर्ग की कमर तोड़ दी गई है। ऐसा लगता है, जैसे सोची समझी साजिश के तहत कमजोर वर्ग को शिक्षा से वंचित करने के लिए एकदम से फीस बढ़ा दी गई है।

सबकी बात करने वालों को सोचना चाहिए कि हमारे कदम से कहीं ऐसा न हो कि कोई भी शिक्षा से वंचित रह जाए। ऐसा लगता है जैसे जानबूझकर भी सत्ता में बैठे लोग गरीबों को व उनके बच्चों के शैक्षणिक-सामाजिक- आर्थिक विकास को रोकने का कार्य कर रहे हैं। बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाकर, चर्चा में रहने वाले लोग, आज हर छात्र से ज्यादा से ज्यादा धन उगाही करना चाहते हैं। मैं अपने मित्रों व समाज के लोगों से  आपेक्षा करता हूं कि यथाशीघ्र आंदोलन चलाकर इस फीस वृद्धि को वापस लेने के लिए  यू पी सरकार को मजबूर किया जाना चाहिए।

जय भारत !
जय जय जय !

विनोद सचान**

Saturday, July 6, 2019

देश का बजट

देश का बजट >>
देश में बहुत बड़ा परिवर्तन हुआ और इसे बजट या बजट पास करने के तरीके में खास तौर पर देखा जा सकता है। बहुत ही अथक प्रयास किए जा रहे हैं कि देश में परिवर्तन हो, किसी भी तरीके से परिवर्तन दिखे, लेकिन यह जो परिवर्तन है न, यह दिखने का नाम ही नहीं ले रहा है। लेकिन यह लोग भी पक्के हैं कैसे नहीं दिखेगा, इन्होंने कभी पढ़ा था, "करत करत अभ्यास ते", वहीं अभ्यास यह लगातार आज भी कर रहे हैं। इन्हें हो चाहे न हो लेकिन हमें उम्मीद है कि एक न एक दिन परिवर्तन अवश्य होगा। जब होगा तो दिखेगा, जरूर दिखेगा।

अब देख लीजिए, भाई पुरुषों का काम तो है नहीं घर की देखभाल करना और बार-बार पुरुष ही देश का बजट प्रस्तुत करें, यह थोड़ा भद्दा दिख रहा था। अरे भाई आज हर घर का मालिक स्त्री ही तो होती है। जब पूरे खर्चों का ध्यान रखती है, तो क्यों न बजट स्त्री ही प्रस्तुत करें। सो मोदी जी ने फट से जेटली जी को बताया और निर्मला सीतारमण जी को वित्त मंत्रालय थमाया। यह मिला जी भी देश की सीमाओं पर जाकर व्यवस्थाएं देख चुकी थी और देश की सुरक्षा की आवश्यकताओं को देख चुकी थी, सो भाई ! वह भी आ गई वित्त मंत्रालय में खर्चों का विश्लेषण करके बजट तैयार करने के काम में। तो पहला ही परिवर्तन यह हुआ कि देश की किसी पूर्ण कालिक महिला वित्त मंत्री ने देश का बजट प्रस्तुत किया।

देश का बजट पहले विदेशों जैसा ब्रीफकेस में प्रस्तुत किया जाता था, कितना भद्दा लगता था, अपने यहां का आदमी और अंग्रेजो जैसा ब्रीफकेस में बजट प्रस्तुत कर रहा था। इसमें भी काफी फर्क था कि काला आदमी और हाथ में ब्रीफकेस, तब देश का बजट I सभी विसंगतियों को दूर करते हुए मोदी जी ने अपनी घोषणाओं के अनुरूप नए अंदाज में प्रस्तुत कराया। लाल रंग की मखमली कपड़े में लिखते हुए बही खाते को हाथों में दबाए वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण ने लोकसभा में प्रस्तुत किया। वाकई परिवर्तन हुआ और बहुत बड़ा परिवर्तन हुआ। इस इसके लिए मोदी जी बधाई के पात्र हैं।

 तमाम परिवर्तन तो यह अखबार करा देते हैं। सुबह-सुबह ही हिंदुस्तान पेपर दिमाग पर मोटे मोटे से लिख दिया अमीर पर कर, गरीब पर करम। अब दिमाग पर बनना शुरु हो गया कि लगता है, बजट बहुत ही अच्छा व सुहावना है। अब आगे महीन अक्षरों को पढ़ने की जरुरत ही नहीं रह जाती। जो ज्यादा महीन ताई के शब्द होते हैं, उन्हें पहले ही सरकार अपने पास रख लेती है। जागरण तो जाहिर है, जैसी सरकार, वैसा नारा लगाता है। उसने तो लिख दिया नये भारत की ओर। मैं अचकचा गया, दिमाग कहां था और कहां आ गया। मुझे तो लगता है इन्होंने लगाए पूरा जोर, परिवार का कोई चला जाए सांसद की ओर। अब सोच रहे थे, क्या पढ़े, सब कुछ अच्छा ही अच्छा है। यह अखबार वाले भी अच्छी खासी मति पलट देते हैं। समाचार से लाकर, प्रचार में अटका देते हैं।

 अपने को तो न बजट से फायदा होना था। न नुकसान होना था। न घाटे मे आना था। न कहीं दूर तक जाना था। सो मोटिया टाइप का पढ़ लिया, और दिमाग में बैठा लिया, भला सेठों का ही होना है। अभी चुनाव तो हैं नहीं, जो जनता के हुक्का पानी पर रहम करेगा या उसकी रोटी कपड़ा और मकान की व्यवस्था करेगा।

चाहे जैसा भी कह लो,
तुम्हारा बजट बेईमानी है।
यदि भ्रष्टाचार दूर नहीं होगा,
तो विकास एक कहानी है ॥

जय भारत !
जय जय जय !
"विनोद सचान ''

आनलाइन भ्रष्टाचार-रेलवे R.P.F.

आनलाइन भ्रष्टाचार--- रेलवे ऑनलाइन खरीदारी के तर्ज पर ऑनलाइन रिश्वत का भी मामला आज प्रकाशित हुआ है। विदित हो कि राजधानी एक्सप्रेस में आरप...