डग्गामार के संबंध में कुछ कार्रवाई न होने के बाद, आज से 15 साल पूर्व की स्थिति में और आज की स्थिति में परिवर्तन ना होने के स्थिति में अपनी एक पोस्ट के संबंध में हमने लिखा >>
3 वर्ष पूर्व डग्गामार के संबंध में। जो स्थित कल थी, वह स्थित है आज । कोई भी परिवर्तन ना हुआ है, ना दिख रहा है। जो एक चीज देखने में आ रही है , पुलिस भगाती है, डग्गामार फिर हावी हो जाता है। ऐसा लगता है जैसे पुलिस की कोई मजबूरी है। कोई राजनीतिक दल तो हस्तक्षेप करता ही नहीं है क्योंकि उसे अपने शासन में यही डग्गामार कराकर कमाना होता है। समाजसेवी इसलिए मजबूर है कि कोई भी सुनने वाला नहीं है। एक आध घंटे के लिए हट भी जाएंगे तो यह फिर से डट जाते हैं॥ समाचार पत्रों में सरकारी विज्ञापन होता है तो उसमें स्थान नहीं मिलता है ऐसे समाचारों को। समस्याएं हैं लेकिन इनके हल्की किसी को सकता नहीं है। दुर्घटना होगी एक आध मरेंगे तो इसके बाद एक दो दिन डग्गामारी बंद रहेगी इसके बाद फिर शुरू हो जाती है। यानी कुल मिलाकर कानून का कहीं भी राज नहीं है। जैसा आज से 10- 12 साल पहले होता था तीन-चार साल पहले होता था। वैसा ही इस सरकार में हो रहा है। ना तो कहीं कानून दिखता है ना सरकार दिखती है। जनता है ऐसे ही जीती है ऐसे ही मर जाती है। यहां किसी चिंता है किसी के मरने जीने की ।
हमारे Facebook के मित्र शरद सचान द्वारा मनमोहन सिंह को पुनः योग्य प्रधानमंत्री बताए जाने पर हमने अपनी बात को स्पष्ट किया
शरद जी, मजबूरी में किसी को सत्ता थमा दी जाए वह एक अलग चीज है। वरना जो बात नए लोगों में होती है, जो विजन लोगों में होता है, जो बदलाव की चाहत नए लोगों में होती है, वह पुराने लोगों में नहीं होती। मनमोहन सिंह के जमाने में ही घोटालों की बहुत बड़ी फेहरिस्त थी। एक राष्ट्र संचालक द्वारा अपने ऊपर या नीचे हो रहे घोटाले को न समझ पाना उसकी बहुत बड़ी असमर्थता होती है। जहां तक मेरा मानना है कि हम मनमोहन सिंह को एक देश के लिए उचित प्रधानमंत्री नहीं कह सकते हैं। इन्होंने कभी भी जनता के सवालों का जवाब जनता के सामने आकर नहीं दिया है और आज भी जबकि यह विपक्ष में हैं इनको इनकी नीतियों का समय-समय पर समीक्षा करना चाहिए, उसका विरोध करना चाहिए। उसके पक्ष या विपक्ष में कुछ अपनी राय दाखिल करना चाहिए। आज भी शांत है तब भी शांत थे और आगे बना दोगे तब भी शांत ही रहेंगे। अब यह देश को वाकई ऐसा शासक चाहिए जो यह सुनिश्चित करें कि जनता को कानून का पालन करना होगा और कानून अपना काम उचित ढंग से करेगा। कोई भी अपराधी या अपराधिक काम समाज से, कानून से, जनता से छिप नहीं सकेगा। किसी भी कार्य में भ्रष्टाचार का विरोध न किया जाना, तब की सरकार में भी गलत था, आज की सरकार में भी गलत है। ऐसा लगता है कि भ्रष्टाचार के नाम पर यह सभी सरकारें एक दूसरे से सहमत हैं और आगे भी रहेंगी। मेरे ख्याल से अब ऐसी सरकार आवे जो जनता को कानून का आभास करावे और भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त न कर पाए तो इसके प्रति अपना कोई ठोस कार्य तो करें ॥ जय भारत ! जय जय जय !
इसी विषय पर बृजेश सिंह ने चर्चा की और विचारों को उत्तम बताया फिल्म उनके विचारों का जवाब हमने इस प्रकार दिया देखें और समझें >>
3 वर्ष पूर्व डग्गामार के संबंध में। जो स्थित कल थी, वह स्थित है आज । कोई भी परिवर्तन ना हुआ है, ना दिख रहा है। जो एक चीज देखने में आ रही है , पुलिस भगाती है, डग्गामार फिर हावी हो जाता है। ऐसा लगता है जैसे पुलिस की कोई मजबूरी है। कोई राजनीतिक दल तो हस्तक्षेप करता ही नहीं है क्योंकि उसे अपने शासन में यही डग्गामार कराकर कमाना होता है। समाजसेवी इसलिए मजबूर है कि कोई भी सुनने वाला नहीं है। एक आध घंटे के लिए हट भी जाएंगे तो यह फिर से डट जाते हैं॥ समाचार पत्रों में सरकारी विज्ञापन होता है तो उसमें स्थान नहीं मिलता है ऐसे समाचारों को। समस्याएं हैं लेकिन इनके हल्की किसी को सकता नहीं है। दुर्घटना होगी एक आध मरेंगे तो इसके बाद एक दो दिन डग्गामारी बंद रहेगी इसके बाद फिर शुरू हो जाती है। यानी कुल मिलाकर कानून का कहीं भी राज नहीं है। जैसा आज से 10- 12 साल पहले होता था तीन-चार साल पहले होता था। वैसा ही इस सरकार में हो रहा है। ना तो कहीं कानून दिखता है ना सरकार दिखती है। जनता है ऐसे ही जीती है ऐसे ही मर जाती है। यहां किसी चिंता है किसी के मरने जीने की ।
हमारे Facebook के मित्र शरद सचान द्वारा मनमोहन सिंह को पुनः योग्य प्रधानमंत्री बताए जाने पर हमने अपनी बात को स्पष्ट किया
शरद जी, मजबूरी में किसी को सत्ता थमा दी जाए वह एक अलग चीज है। वरना जो बात नए लोगों में होती है, जो विजन लोगों में होता है, जो बदलाव की चाहत नए लोगों में होती है, वह पुराने लोगों में नहीं होती। मनमोहन सिंह के जमाने में ही घोटालों की बहुत बड़ी फेहरिस्त थी। एक राष्ट्र संचालक द्वारा अपने ऊपर या नीचे हो रहे घोटाले को न समझ पाना उसकी बहुत बड़ी असमर्थता होती है। जहां तक मेरा मानना है कि हम मनमोहन सिंह को एक देश के लिए उचित प्रधानमंत्री नहीं कह सकते हैं। इन्होंने कभी भी जनता के सवालों का जवाब जनता के सामने आकर नहीं दिया है और आज भी जबकि यह विपक्ष में हैं इनको इनकी नीतियों का समय-समय पर समीक्षा करना चाहिए, उसका विरोध करना चाहिए। उसके पक्ष या विपक्ष में कुछ अपनी राय दाखिल करना चाहिए। आज भी शांत है तब भी शांत थे और आगे बना दोगे तब भी शांत ही रहेंगे। अब यह देश को वाकई ऐसा शासक चाहिए जो यह सुनिश्चित करें कि जनता को कानून का पालन करना होगा और कानून अपना काम उचित ढंग से करेगा। कोई भी अपराधी या अपराधिक काम समाज से, कानून से, जनता से छिप नहीं सकेगा। किसी भी कार्य में भ्रष्टाचार का विरोध न किया जाना, तब की सरकार में भी गलत था, आज की सरकार में भी गलत है। ऐसा लगता है कि भ्रष्टाचार के नाम पर यह सभी सरकारें एक दूसरे से सहमत हैं और आगे भी रहेंगी। मेरे ख्याल से अब ऐसी सरकार आवे जो जनता को कानून का आभास करावे और भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त न कर पाए तो इसके प्रति अपना कोई ठोस कार्य तो करें ॥ जय भारत ! जय जय जय !
इसी विषय पर बृजेश सिंह ने चर्चा की और विचारों को उत्तम बताया फिल्म उनके विचारों का जवाब हमने इस प्रकार दिया देखें और समझें >>
Brijesh Singh जी, जैसा की मैंने अभी देश की विभिन्न यात्राओं में कानपुर से लेकर कोलकाता तक और कानपुर से लेकर के उड़ीसा तक और इसके आस-पास जो हमने देखे। जो हमने इमारतें देखी, जो हमने विकास देखें, वह आज के नही दिखे। अभी के नहीं दिखे। वह सभी विकास कार्य आज से 30 साल पहले या 15 साल पहले याकोई 10 साल पहले का, मेरा मतलब जो भी उम्र का है, वैसा विकास दिखा। लेकिन कहीं भी नवीनतम विकास हमको नहीं दिखा। यह ऐसा महसूस होता है कि जैसे यह 5 साल हमारे मिट्टी में चले गए। देश को यह जो अभी मोदी जी द्वारा आते ही लागू की गई नोटबंदी से भी कोई लाभ नहीं मिला। आप कहोगे की डुप्लीकेट करेंसी, तो वो आज भी है। यह तो सामाजिक अपराध है, यह बराबर, हर समय, हर शासन में रहते हैं। इनको नियंत्रण करने की क्षमता शासन में हो, बस वही शासन होता है। रह गई बात की अगर सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह की सरकार को पीछे से चला रही थी, तो आज मोदी जी की सरकार को भी RSS चला रहा है और देश में जो SC/ST के नाम से हिंदुओं के बीच में जो आपसी भाईचारा था, उसको भी कुछ संगठन या उनके किसी दूसरे संगठनों के द्वारा समान्य बनाम SC/ST करके प्रचारित किया गया और इनके बीच एक खाई तैयार कर दी गई ।विकास आज भी विकास की बाट जोह रहा है, उसका कोई पुरसाहाल नहीं है। अगले 5 साल भी इनको दे दो, कुछ होने हवाने वाला नहीं है। देश जहां है, वही है। आज जब हम अपने आसपास जो समस्याएं देखते हैं वह 10 साल पहले भी थी, 5 साल पहले भी थी, आज भी है। भ्रष्टाचार पिछले 10 सालों से चरम पर है। इसका कोई भी ऐसा उपाय नहीं है कि राज्य स्तर पर कोई ऐसा उपाय किया जाए जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके। यही हमारा कहना है कि हमारे पास विकल्प ही नहीं है और हमारे पास इनका संकल्प भी नहीं है ।मौके के अनुसार, समय की नजाकत को देखते हुए, देश हित में ही कोई निर्णय लिया जाए, वही उचित होगा।
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