Wednesday, May 8, 2019


यहां पर बात यह हो रही है कि आज देश को सुधार की आवश्यकता है। विकास की ओर सकता है और मानव समाज की तमाम समस्याओं के खात्मे की आवश्यकता है। भ्रष्टाचार समाप्त करने की आवश्यकता है। लोगों के जीवन स्तर को उठाने की आवश्यकता है।

लेकिन सत्ताधारी भाजपा और विपक्ष में रही कांग्रेस दोनों ने उपरोक्त सभी मुद्दों को छिपा दिया। एक दूसरे की बुराई करके ही इस देश को भरमाना चाहते हैं और शासन करना चाहते हैं। यहां न कोई देश के भले की बात कर रहा है और न ही इंसान के जीवन की रक्षा की बात कर रहा है और न ही सामाजिक विकास की बात कर रहा है। न ही देश में आधारभूत संरचनाओं के विकास की बात कर रहा है। कोई अपने सत्ता काल को दोबारा लाना चाहता है तो कोई खुद को सत्ता में लाना चाहता है। दोनों ही जनता की कमजोरी को पहचान गए हैं। एक तो धार्मिक उन्मादी लोग है जो जनता की मानसिक रूप से कमजोरी का फायदा उठाकर के सत्ता में कायम होना चाहते हैं। दूसरा भी कुछ कम नहीं, वह दूसरे समुदाय को अपना बना कर के, उनको सुरक्षा की गारंटी देना चाहता है। इसी के बहाने गद्दी में बैठना चाहता है।
यहां केवल बात चल रही है तो अपने स्वार्थ की चल रही है कोई न देश के लिए जी रहा है और न ही मर रहा है। यदि वह देश के लिए अपनी कुर्बानी बताता है तो आप समझ लेगा कि वह केवल अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा कर रहा है। अब तो ऐसा महसूस होने लगा है की कोई धर्म के भरोसे तो कोई अपने परिवारिक और खानदान के भरोसे केवल और केवल गद्दी का सपना देख रहे हैं।
इन्हीं के बीच में उत्तर प्रदेश से बसपा की मायावती और सपा के अखिलेश द्वारा समझौता कर लेने पर गठबंधन का नया फार्मूला तैयार हुआ। इनका भी यही उद्देश है कि किसी न किसी बहाने हमें सत्ता हथियाना चाहिए। गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में अपनी लड़ाई तो मजबूत की लेकिन प्रदेश के बाहर उनकी स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि केंद्र की सत्ता में अपना परचम लहरा सके। जाहिर सी बात है कि जनता द्वारा दिया गया गठबंधन को जनसमर्थन का उपयोग भाजपा के पूर्व बहुमत न मिलने पर, बनाने में काम आ सकता है। यह भी अपनी बात कहते हैं और यहां भी विकास का कोई मुद्दा हावी नहीं है।
भाजपा ने 1914 के पूर्व देश की समस्याओं को कम कांग्रेस की कमियों को ज्यादा उभारा। शुरू से लेकर के चुनाव खत्म होने तक केवल कांग्रेस को कोसते रहे और उसके साथ अपने कुछ विकास के नारे दिए थे। जनता से तमाम वादे किए थे, जिसमें इनका कोई भी वादा पूरा नहीं हुआ है। इनके बनने के बाद जनता के लिए कोई विशेष सहूलियते भी नहीं हुई है। तमाम तरीके की नियोजित और बगैर मूल्यांकन की चलने वाली योजनाएं भ्रष्टाचार का शिकार हो गई और जनता छली गई। यह जानते थे कि हम पिछले वह कोई भी वादा पूरी नहीं कर पाए हैं तो इन्होंने सेना के नाम का उपयोग चुनाव जीतने के लिए पूर्ण रूप से किया। मानसिक रूप से प्रभावित करने वाले यह लोग, विभिन्न प्रकार की बातें और आरोपों से लोगों के दिमाग में फिर से अपनी बात भरने लगे।
पांच वर्ष सत्ता में गुजारने के बाद आज भी इनके हाथ खाली हैं। इनके पास विकास नाम की कोई चीज नहीं है और चुनावी लाभ लेने के लिए किसान सम्मान योजना का चुनाव के पहले संचालित करना, देश के साथ एक बहुत बड़ी साजिश है।
कभी कांग्रेस को गाली देना, कभी उस राहुल गांधी को अंड संड बकना, तो कभी उनके परिवारिको को तमाम आरोप पढ़ कर के अपना नगमा बुलंद करना कुछ समझ में नहीं आता है।
कुछ लोग जानना चाहते हैं कि कांग्रेस ने देश के साथ क्या कर दिया है तो पहले उन्हें यह सोच लेना चाहिए कि पांच साल में भाजपा ने क्या कर लिया है। इन लोगों को जब कोई काम नहीं मिलता है तो उसके एवज में अंट- संट लिखने लगते हैं ताकि सोशल मीडिया में हतोत्साहित कर सके। न यह अच्छे-न वो अच्छे, तो क्या बुरे ही देश में शासन करेंगे। सबको लिखना होता है। सबकी अपनी मानसिक स्थिति होती है। सबका अपना लक्ष्य होता है। हर कोई किसी न किसी से प्रभावित होता है जब वह मानसिक रूप से ज्यादा जाकर जाता है तो उसका व्यवहार समाज में व इस सामाजिक मंच पर आतंकियों जैसा हो जाता है वह अपने आगे किसी दूसरे की बात न सुनना चाहता है और न ही समझना चाहता है।


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