सैनिकों के नाम पर थोथी राजनीति करने वालों ने यह नहीं सोचा कि हम पुलवामा हमले में शहीद हुए तमाम सैनिकों के परिजनों को, आज देश की नई सरकार के गठन के मौके पर बुलाया जाए।
भाजपा के मोदी, मोदी की भाजपा जो भी कहो, उनकी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली में आयोजित किया गया है। इस समारोह में देश के अंदर से लोगों को चुन-चुन कर बुलाया गया है और देश के बाहर से विदेशी मेहमानों को आमंत्रित किया गया है। यह समारोह कहां तो जाता है सादगी पसंद बड़े ही हल्के माहौल में प्रसन्नचित्त होकर के संपन्न कराया जाएगा। देखिए मौके में क्या होता है इसे हम सब बाद में समझ पाएंगे। आइए तब तक इन आयोजन से संबंधित कुछ बिंदुओं पर चर्चा की जाए।
देश के लोकसभा चुनाव के पूर्व जम्मू कश्मीर राज्य के पुलवामा में भारतीय सीमा सुरक्षा बल के जवानों से भरी हुई एक बस को एक कार से टकराकर विस्फोट कर दिया गया था। इस बस के चिथड़े उड़ गए थे और हमारे काफी जवान शहीद हो गए थे। सीमा पर सेवा देने वाले यह जवान अपनी ड्यूटी के लिए जा रहे थे। लेकिन आतंकी गतिविधि के कारण शहीद हुए जवानों को, देश में सदमे के रूप में देखा गया I पूरा देश अवाक रह गया और इस घटना की चारों तरफ निंदा होने लगी पाकिस्तान और घटना की जिम्मेदारी लेने वाले जैस संगठन की मुखालफत होने लगी। पूरा देश एक सुर में अब पाकिस्तान से या जैस संघठन पर हमला करने की मांग होने लगी। चुनाव का माहौल था सरकार के पास मुद्दा था और सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक पाकिस्तान के अंदर घुसकर की। परिणाम जो भी आया, हम आप सभी लोग उससे वाकिफ हैं। अब इस जगह वही सवाल उठाया गया है कि देश की सीमा में रात दिन सेवा देने वाले यह जवान, जब शहीद हो जाते हैं, तो उनके घर में खाने के लाले पड़ जाते हैं। इन जवानों को पेंशन नहीं दी जाती है। इन जवानों के शहीद होने पर इनके घर तक संवेदना ओं का जाहिर करने का कार्यक्रम क्षेत्रीय नेताओं द्वारा किया गया और फिर इसके बाद इस हमले का धीरे-धीरे लोग चुनाव के कारण भूलने से लगे। और अब अभी लगता है किस शपथ लेने वाले लोग इन शहीदों को या इनके परिवार को भूल गए क्योंकि इसका अखबारों सहित कहीं भी उल्लेख नहीं आया कि शहीदों के परिजनों को शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया गया है।
लोकसभा के चुनाव में चुनाव आयोग के निर्देशों के बावजूद कि सेना का उल्लेख प्रचार में नहीं किया जाएगा, किंतु भाजपा द्वारा या भाजपा के नरेंद्र मोदी द्वारा मंच से इस घटना का उल्लेख किया गया। यहां तक कि इन सैनिकों की शहादत के नाम पर वोट मांगे गए। वोट पड़े और भाजपा या नरेंद्र मोदी जी की भारी बहुमत से जीत हुई। जाहिर सी बात है कि यदि जीत होनी है तो सरकार भी बननी है। जब सरकार बनेगी तो शपथ ग्रहण समारोह भी होगा। अभी शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा द्वारा अभी हाल के चुनाव में देश के विभिन्न हिस्सों में मारे गए कार्यकर्ताओं के परिजनों को निमंत्रण दिया गया है। कार्यकर्ताओं को बुलाया गया है और समाज के विशिष्ट लोगों को आमंत्रित किया गया है।
यदि शपथ ग्रहण समारोह में सैनिकों के नाम पर वोट मांग कर सरकार बनाने वाले मोदी जी ने उन शहीद सैनिकों के परिजनों को याद नहीं किया है यानी शपथ समारोह में नहीं बुलाया है तो यह समझा जाना चाहिए कि लोगों ने उनको भुलाने की कोशिश की है।
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